Merry Christmas Review: श्रीराम राघवन की फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ एक सस्पेंस से भरी अनोखी लव स्टोरी है। इस फिल्म में कटरीना कैफ और विजय सेतुपति मुख्य भूमिकाओं में हैं।
फिल्म की कहानी है मारिया (कटरीना कैफ) और एल्बर्ट (विजय सेतुपति) की। ये दोनों अजनबी एक रात मिलते हैं और जैसे-जैसे रात आगे बढ़ती है, वैसा-वैसा उनके बीच का रोमांस और इस कहानी का सस्पेंस गहरा होता जाता है।
फिल्म की शुरुआत दो मिक्सर ग्राइन्डर से होती है। एक में सफेद और नीली टेबलेट डाली जाती हैं और दूसरे में दाल, मूंगफली और लाल मिर्च। इन दोनों मिक्सर की अपनी स्टोरी है, जो आपको फिल्म में आगे जाकर पता चलती है।
एल्बर्ट सालों बाद बंबई शहर वापस आया है। उसका कहना है कि वो आर्किटेक्ट है और दुबई में रह रहा था। बंबई में एल्बर्ट का घर है, लेकिन उसमें उसके साथ रहने वाली मां चल बसी है। क्रिसमस ईव का मौका है तो वो घर में बैठने के बजाए बाहर घूमने का फैसला करता है।
वहीं, मारिया एक होटल में काम करती है। वह एक बुजुर्ग महिला की देखभाल करती है। क्रिसमस ईव को वह महिला मर जाती है और मारिया को उसके अंतिम संस्कार में शामिल होना पड़ता है।
एक रात, एल्बर्ट और मारिया एक बार में मिलते हैं। दोनों एक-दूसरे से आकर्षित हो जाते हैं और एक साथ रात बिताते हैं। लेकिन अगली सुबह, मारिया को पता चलता है कि एल्बर्ट एक मर्डर केस का संदिग्ध है।
मारिया को पता चलता है कि एल्बर्ट की मां की हत्या हुई है और वह इस हत्या का जिम्मेदार है। वह एल्बर्ट को बचाने की कोशिश करती है, लेकिन उसे पता चलता है कि एल्बर्ट एक खतरनाक आदमी है।
फिल्म का अंत एक सस्पेंस के साथ होता है। यह पता नहीं चलता है कि एल्बर्ट की मां की हत्या कौन और क्यों की।
फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन ने एक अच्छी कहानी लिखी है। फिल्म का सस्पेंस काफी अच्छा है और दर्शकों को बांधे रखता है। कटरीना कैफ और विजय सेतुपति ने अपनी भूमिकाओं को अच्छी तरह से निभाया है।
कुल मिलाकर, ‘मेरी क्रिसमस’ एक अच्छी फिल्म है। अगर आप सस्पेंस से भरी फिल्में पसंद करते हैं, तो आपको यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।
कटरीना कैफ ने भी काफी अच्छा काम किया है. उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनका पूरा अंदाज काफी बढ़िया है. राघवन ने इस फिल्म में किसी को एक्स्ट्रा सेंशुअस नहीं दिखाया है. यहां चीजें काफी आराम से होती हैं और सबकुछ काफी नेचुरल है. फिल्म में विनय पाठक, टीनू आनंद, संजय कपूर, प्रमिता काजमी और अश्विनी कलसेकर ने काम किया है. सभी ने अपने किरदारों को बखूबी निभाया. एक्ट्रेस राधिका आप्टे का छोटा-सा कैमियो भी अच्छा था.
फिल्म में बहुत-सी कमियां हैं, जिन्हें देखते हुए आपको लगता है कि ये थोड़ी और बेहतर हो सकती थी. अगर आप ‘अंधाधुन’ जैसा कुछ रोमांचक देखने की उम्मीद के साथ जा रहे हैं तो निराश होंगे. ये फिल्म अपने आप में अलग है. इसमें भी आपको काफी कुछ डार्क देखने को मिलेगा, लेकिन ये आराम से बैठकर एक्सपीरिएंस करने वाली फिल्म है.
