भारतीय रेलवे ने चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूर बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए भूमि सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 435 किलोमीटर है और इसमें तमिलनाडु और कर्नाटक के 9 स्टेशन होंगे।
सर्वेक्षण का काम हैदराबाद स्थित एक फर्म द्वारा किया जा रहा है। सर्वेक्षण में भू-आकृति विज्ञान, भूविज्ञान, पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक कारकों का अध्ययन किया जाएगा।
सर्वेक्षण के पूरा होने के बाद, एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। डीपीआर में परियोजना की लागत, समयरेखा और तकनीकी विवरण शामिल होंगे।
चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूर बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण 2027 में शुरू होने की उम्मीद है और इसका संचालन 2030 तक शुरू होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर से चेन्नई और मैसूर के बीच की दूरी को केवल 1 घंटे 10 मिनट में तय किया जा सकेगा।
बुलेट ट्रेन के लाभ:
- चेन्नई और मैसूर के बीच की दूरी को कम करने से यात्रा का समय कम होगा।
- लोगों को दोनों शहरों के बीच आवाजाही में आसानी होगी।
- बुलेट ट्रेन के परिचालन से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
बुलेट ट्रेन की चुनौतियां:
- भूमि अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती होगी।
- परियोजना की लागत भी अधिक है।
- बुलेट ट्रेन के संचालन में सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
