पटना, 24 जनवरी 2024 – बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और बाद में नेता विरोधी दल रहे कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिलने के बाद राजद के दिग्गज नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एक दिलचस्प कहानी सुनाई।
सिद्दीकी ने बताया कि वह 1952 में पहली बार चुनाव लड़ने जा रहे थे। उस समय उनके पास पैसे नहीं थे। वह कर्पूरी ठाकुर से मिले और उनसे मदद मांगी।
कर्पूरी ठाकुर ने सिद्दीकी को 500 रुपये दिए और कहा, “यह पैसा चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त है।”
सिद्दीकी ने बताया कि उन्होंने कर्पूरी ठाकुर से कहा, “सर, यह पैसा तो बहुत कम है। चुनाव लड़ने के लिए बहुत सारा पैसा चाहिए।”
सिद्दीकी ने कर्पूरी ठाकुर के विश्वास पर खरा उतरा और चुनाव जीत गया। वह बिहार विधानसभा में पहुंचे और कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में सरकार में मंत्री बने।
सिद्दीकी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर एक महान नेता थे। वे गरीबों और दलितों के मसीहा थे। उन्होंने बिहार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सिद्दीकी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिलने से देश का गौरव बढ़ा है। सिद्दीकी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर के जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है। हमें उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास करना चाहिए।
