भारत सरकार देश में महंगाई कम करने और आम जनता के जेब से बोझ हटाने के लिए हर संभव कोशिश करने में लगी हुई है. इसके लिए दूसरे मुल्कों से बातचीत करनी हो या फिर भारत में फूड प्रोडक्ट के संकट से बढ़ती महंगाई को कम करना हो. भारत सरकार वह हर काम कर रही है, जिससे की देश में तरक्की की नई कहानी लिखी जा सके.
मोदी सरकार देश के नागरिकों के अच्छे दिन के लिए दिन रात काम कर रही है. कुछ महीना पहले केंद्र सरकार ने गेहूं, चावल और चीनी के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी. इससे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, लेकिन इंडिया से बाहर माल नहीं जाने पर वह देश की जनता को उचित कीमत पर उपलब्ध हो जा रहा है. इससे अचानक से महंगाई आसमान नहीं छू रही है.
बैन हटाने का कोई इरादा नहीं
कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि सरकार के सामने फिलहाल गेहूं, चावल और चीनी के निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाने का कोई भी प्रस्ताव नहीं है.गोयल ने कहा कि भारत का गेहूं और चीनी के आयात का भी कोई इरादा नहीं है. गेहूं, चावल और चीनी पर निर्यात प्रतिबंध हटाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है. इसके साथ ही भारत गेहूं और चीनी का आयात नहीं करेगा.
एक साल से लगा है बैन
भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद जुलाई, 2023 से गैर-बासमती चावल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है. सरकार ने अक्टूबर 2023 में चीनी के निर्यात पर भी रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि गेहूं और चीनी के आयात की न तो कोई योजना है और न ही इसकी कोई जरूरत है. भारत गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद अपने मित्र देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए चावल उपलब्ध करा रहा है. भारत ने इंडोनेशिया, सेनेगल और गाम्बिया जैसे देशों को चावल उपलब्ध कराया है.
