भारतीय इतिहास में, मुगल सम्राट अकबर को एक धर्मनिरपेक्ष शासक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम धर्मों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए कई प्रयास किए। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम अकबर ने तब उठाया जब उन्होंने 1575 ईस्वी में राम-सीता की तस्वीर वाले सोने के सिक्के जारी किए।
इन सिक्कों पर राम और सीता की आकृति के साथ-साथ संस्कृत में “श्री राम चंद्र” और “श्री सीता” लिखा हुआ था। इन सिक्कों को “राम-टका” के नाम से जाना जाता है।
अकबर के इस कदम को हिंदू धर्म के प्रति उनकी आस्था और सम्मान के रूप में देखा जाता है। यह भी माना जाता है कि इससे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ावा मिला।
अकबर के धर्मनिरपेक्ष शासन
अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान कई ऐसे कदम उठाए जो उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष शासक के रूप में स्थापित करते हैं। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों के लिए समान अधिकार और अवसर प्रदान किए। उन्होंने हिंदू मंदिरों के निर्माण और मरम्मत के लिए धन प्रदान किया। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम विद्वानों के बीच चर्चा और बहस को प्रोत्साहित किया।
अकबर के धर्मनिरपेक्ष शासन ने भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने भारत में धार्मिक सहिष्णुता और शांति के विकास में योगदान दिया।
राम-टका सिक्कों का महत्व
राम-टका सिक्के अकबर के धर्मनिरपेक्ष शासन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ये सिक्के (Coins) हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने में मददगार रहे हैं।
इन सिक्कों का महत्व आज भी बना हुआ है। ये सिक्के भारतीय इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और शांति के एक महत्वपूर्ण अध्याय की याद दिलाते हैं।
अब कहां है “राम टका” मुहर
अकबर के शासनकाल के बाद आखिर अब वह सिक्के “राम टका” कहां है चलिए इसके भी जानकारी हम आपको देते हैं, आपको बता दे कि अब कुछ गिनती के सिक्के”राम टका” ही बचे हुए हैं कुछ सिक्के बनारस के बीएचयू (BHU) में भारत कला भवन संग्रहालय के पास संरक्षित हैं, वही एक चांदी और दो सोने के सिक्के (Coins) इंग्लैंड के क्लासिकल न्यूमेसमेटिक ग्रुप (Classical Numismatic Group) के पास हैं.
